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आज के दौर में बुद्ध की उपयोगिता

डाॅ0 उदित राज

Buddha
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सिद्धार्थ गौतम बुद्ध ने दुनिया को बहुत कुछ दिया है| धर्म की बात हो और उसमें महिला और पुरुष का विमर्श कैसे नहीं हो | बड़े धर्मों से लेकर छोटे धर्म तक ने पुरुष को महत्व दिया है | क्यों नहीं कोई महिला किसी धर्म का प्रवर्तक या आविष्कारक हुई | इससे भी पता चलता है की हजारों वर्ष से समाज पुरुषवादी रहा है | जब भगवान गौतम बुद्ध ने उपदेश देना शुरू किया तो उस समय का समाज पुरुष सत्तावादी था | बौद्ध धर्म में खुद के कर्म से पाप और पुण्य निर्धारित होता है न कि चली आ रही परम्पराओं या कोई अन्य कारण | महिलाओं के उत्थान में जितना बौद्ध धर्म का योगदान है शायद किसी और धर्म-पंथ में हो |

आज से पच्चीस सौ वर्ष पहले यह मान्यता थी की बिना पुत्र के मोक्ष प्राप्त  नहीं किया जा सकता |धार्मिक कर्म-कांड, पिंडदान इत्यादि पुत्र ही कर सकता था | महिला का कार्य बच्चा पैदा करना और घर संभालना हुआ करता था | उसे लगातार व्यस्त रखने के लिए घरेलू काम की जिम्मेदारियां दी जाती थी |यह मानते हुए कि अगर यह न किया गया तो खाली दिमाग कुछ खुराफाती काम कर सकता है | पति की  सेवा करना उसका परम कर्तव्य था | नारी खुद मोक्ष प्राप्त नहीं कर सकती थी उसके लिए उसका दूसरा जन्म पुरुष के रूप में होना जरूरी था | जैसे कि अभी भी कहीं – कहीं  पर महिला को अपवित्र समझा जाता है, उस समय के हालात तो बड़े भयावह थे | पुत्र का जन्म देना जरूरी था क्योंकि धार्मिक क्रिया कलाप और वंश चलाना तभी संभव था | गौतम बुद्ध इससे बहुत क्षुब्ध हुए और चुनौती दिया कि कैसे महिला पुरुष के पाप – पुण्य एवं बुरा-भला के लिए जिम्मेदार हो सकती है | इस तर्क से महिला समाज को बड़ी राहत मिली वरना तमाम सारे दुखों और पापों का कारण उन्हे ही समझा जाता था |

बुद्ध के धम्म प्रचार से लड़कियों और महिलाओं को अपना स्वतंत्र जीवन जीने का अधिकार मिला | वे माँ-बाप भाई-बहन की परवरिश खुद कर सकती थी और संपत्ति रखने का अधिकार भी | अपने सास-ससुर का ध्यान उसी तरीके से रखना चाहिए जैसे अपने स्वयं माँ-बाप का | परिस्थिति काल के अनुसार यह उचित माना गया कि वह घर को संभाले | एक समय की बात है जब कौशल के राजा को पुत्री की प्राप्ति हुई तो वह अप्रसन्न हुए | उनको गौतम बुद्ध ने उपदेश दिया कि कुछ महिलाएं पुरुषों से ज्यादा बुद्धिमान है तथा इनमे प्रेम-स्नेह और करुणा कहीं ज्यादा होती है | बुद्ध ने उपदेश दिया कि विवाहित महिला को अपने पति के साथ बर्ताव सही रखना चाहिए | निरंकुशता से दूर और फिजूल खर्ची नहीं होना चाहिए | पति की संपत्ति का ध्यान रखना और व्यभिचार  से बचना, स्वभाव नम्र हो और काम काज में निपुणता | उसी तरीके से पुरुष के लिए भी उन्होंने पर्मिताएँ बताई |

भगवान बुद्ध सुंदरता के ऊपर विचार व्यक्त करते हैं | खेमा नाम की सुंदरी राजा बिंबसार के दरबार की रौनक थी और वह अपने सुंदरता पर बड़ा घमंड करती थी | एक दिन वहाँ जा पहुंची जहां बुद्ध प्रवचन कर रहे थे | बुद्ध को मनोविज्ञान में महारथ हासिल थी और वह समझ गए और उन्होंने प्रवचन दिया कि बचपन से जवानी और एक दिन बुढ़ापा सबका आना है | जब बुढ़ापा आता है तो सहारे से चलना होता है दाँत आदि टूट जाते हैं और शरीर भी साथ नहीं देता है | खेमा पर इसका घहरा असर पड़ा और अंत में उसका घमंड टूटा और बाद में जाकर के बहुत बड़ी बुद्ध प्रचारक बनी | कीसा गौतमी कि चर्चाएँ तो आम हैं | कीसा गौतमी को बड़ी मुश्किल से संतान की प्राप्ति हुई थी | परिवार बड़ा था और वही एक संतान थी जिसकी असामयिक मृत्यु हुई | रोते-रोते बेहाल हो गयी तो लोगों ने कहा कि बुद्ध में शक्ति है कि मरे को ज़िंदा कर देते हैं | कीसा गौतमी उनके पास पहुँचती है और विलाप करते हुए कहती है कि उसके बच्चे को ज़िंदा करें |बुद्ध कहते हैं कि जाकर के ऐसे घर से सरसों का दाना लाओ जहां मृत्यु न हुई हो तो बच्चा पुनः जीवित हो सकता है | वह जाती है और ऐसा घर नहीं मिलता है जहां पर कभी मृत्यु न हुई हो | इससे उसे समझ में आ जाती है कि मृत्यु निश्चित है | इसी तरह से दूसरी घटना घटित होती है कि पटचारा नाम कि महिला के घर सभी मर जाते हैं और वह पागलों की तरह व्यवहार करने लगती है | उसे भी उपदेश देते हुए भगवान गौतम बुद्ध कहते हैं कि माँ-बाप, भाई-बहन या और कोई मृत्यु से बचा नहीं सकते | उपदेश इसे भी समझ आता है और अंत में आगे चल करके बड़ी भिक्खुरी बनती है |

बुद्ध के धम्म प्रचार के पाँच साल के अंदर भिक्खुरी संघ कि स्थापना होती है जिसको बहुत बड़ी सफलता मिली | जिस तरह से भिक्खुओं को प्रचार प्रसार करने की  आज़ादी थी वैसे ही भिक्खुरियों को मिली | न केवल पुरुष बल्कि महिलाएं भी प्रचारक बन करके देश-विदेश में धम्म प्रचार का कार्य किया |सम्राट अशोक की पुत्री संघमित्रा प्रचार करने श्रीलंका गयी और इस तरह से कई शताब्दियों तक भिक्खुरी संघ सफल कार्य करता रहा | अंत में पुरुष समाज ने येन केन प्रकारेण ने अपना कब्जा जमा लिया और भिक्खुरी संघ कमजोर हो गया | चीन और जापान में उस समय की भिक्खुरी परंपरा को आज भी देखा जा सकता है और वहाँ पर अभी भी महिला संघ आत्म निर्भर होकर धम्म का काम कर रहा है | धर्म अपने साथ संस्कार और सोच भी देता है और यही कारण है कि बर्मा, थाइलैंड ,कंबोडिया, चीन, जापान आदि देशों में जहां पर बौद्ध धर्म है वहाँ पर महिलाओं की भागेदारी शिक्षा, कारोबार आदि क्षेत्र में अधिक है | बौद्ध धर्म में तर्क को स्थान दिया जाता है और इंसान के स्वयं के कर्म से ही उसका बुरा-भला निश्चित होता है ऐसे में महिला न अपवित्र है न किसी पाप की वजह है | इस विचार से स्वाभाविक रूप से महिला-पुरुष समान हो जाते हैं|

   – डाॅ0 उदित राज 

Dr. Udit Raj
Dr. Udit Raj

संसद सदस्य (लोक सभा) 

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