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क्या उम्मीदों पर खरा उतरेगा ओली की भारत यात्रा?

Nirbhay Karn
Nirbhay Karn

निर्भय कर्ण  : 
नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ‘ओली’ की तीन दिवसीय भारत या़त्रा उनकी दूसरी और इस साल फरवरी में फिर से कार्यभार संभालने के बाद पहली भारत यात्रा है। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली भारत की राजकीय यात्रा पर आए। प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के भारत आगमन पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति भवन में उनका जोरदार स्वागत किया। उन्हें गार्ड आफ आनर भी दिया गया।s20180407124193
यह विदित है कि भारत और नेपाल का सदियों से एक दूसरे के साथ सांस्कृतिक, धार्मिक और राजनीतिक संबंध रहा है। लेकिन अतीत में नेपाल और भारत में बदलते सत्ता समीकरणों ने दोनों देशों के संबंधों को प्रभावित किया है। इस समय प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली कहीं ज्यादा मजबूती के साथ अपने देश का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और उनकी इस भारत यात्रा से दोनों देशों के बीच संबंध एक नए आयाम में पहुंचता लग रहा है। यह वास्तविकता है कि ओली इस वक्त ऐसी स्थिति में हैं जब वे नई दिल्ली और बीजिंग के साथ सबसे बेहतर तरीके से नेपाल के संबंधों को आगे बढ़ा सकते हैं। अपनी मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब नेपाली प्रधानमंत्री से यह कहा कि भारत की द्विपक्षीय सहायता अब काठमांडू की प्राथमिकता से तय होगी तो इसका अर्थ यही है कि भारत सरकार नई वास्तविकता को स्वीकार कर रही है। इसी संदर्भ में ओली का कहना था कि ‘‘21वीं सदी की सच्चाईयों को ध्यान में रखते हुए वे ‘भरोसे की बुनियाद’ पर दोनों देशों के बीच रिश्तों की बुलंद इमारत खड़ी करना चाहते हैं।’’ इन बयानों से यह स्पष्ट होता है कि भारत और नेपाल के संबंध अब एक नए आयाम में प्रवेश करने जा रही है।
नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैदराबाद हाउस नई दिल्ली में विकास परियोजनाओं पर भारत-नेपाल संयुक्त प्रेस वक्तव्य में शामिल हुए। दोनों प्रधानमंत्रियों ने संयुक्त प्रेस वक्तव्य में दोनों देशों के बीच बहुआयामी संबंधों के संपूर्ण दायरे की व्यापक समीक्षा की। उन्होंने दोनों सरकारों, निजी क्षेत्र और लोगों के बीच बढ़ती साझेदारी का स्वागत किया। दोनों प्रधानमंत्रियों ने समानता, परस्पर विश्वास, सम्मान और लाभ के आधार पर द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का संकल्प भी लिया। इस बात को याद करते हुए कि भारत और नेपाल के मैत्रीपूर्ण संबंध साझा ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक संबंधों और जनता के करीबी संबंधों की मजबूत नींव पर आधारित हैं, दोनों प्रधानमंत्रियों ने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत बनाने के लिए नियमित उच्चस्तरीय राजनीतिक दौरों के महत्व पर बल दिया।
प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने कहा कि उनकी सरकार भारत के साथ मैत्रीपूर्ण संबंधों को और अधिक मजबूत बनाने को अत्यधिक महत्व देती है। उन्होंने नेपाल सरकार की द्विपक्षीय संबंधों को इस तरह से विकसित करने की इच्छा को व्यक्त किया जिससे कि नेपाल आर्थिक बदलाव और विकास के लिए भारत की प्रगति और समृद्धि से लाभांवित हो सके। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को आश्वस्त किया कि भारत, नेपाल सरकार की प्राथमिकताओं के अनुसार नेपाल के साथ साझेदारी को सुदृढ़ बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत सरकार की सबका साथ-सबका विकास की विचारधारा समावेशी विकास और समृद्धि की एक साझा संकल्पना के लिए पड़ोसी देशों के साथ भारत के संबंधों के लिए एक दिशा-निर्देशक ढांचे की तरह काम करती है। प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने कहा कि एक ऐतिहासिक राजनीतिक परिवर्तन के बाद उनकी सरकार ने ‘समृद्ध नेपाल और सुखी नेपाल’ के मूलमंत्र के आधार पर आर्थिक बदलाव को प्राथमिकता दी है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल की जनता और नेपाल सरकार को स्थानीय, संघीय और सर्वप्रथम प्रांतीय चुनाव सफलतापूर्वक करवाने के लिए बधाई दी और स्थिरता और विकास के लिए उनकी संकल्पना की प्रशंसा की। दोनों प्रधानमंत्रियों ने बीरगंज में एकीकृत चुंगी का उद्घाटन किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि इसका शीघ्र क्रियांवयन सीमापार व्यापार, वस्तुओं की ढुलाई और लोगों के आवागमन को सुगम बनाएगा, जो कि साझा प्रगति और विकास के अवसर उपलब्ध कराएगा। दोनों प्रधानमंत्री भारत के मोतिहारी में पेट्रोलियम पदार्थों के सीमापार परिवहन के लिए मोतिहारी-अमलेखगंज पाइपलाइन के भूमिपूजन समारोह के भी साक्षी बने। दोनों प्रधानमंत्रियों ने नेपाल में द्विपक्षीय परियोजनाओं को शीघ्रता से पूर्ण किए जाने की आवश्यकता और विविध क्षेत्रों में सहयोगी एजेंडे को प्रोत्साहन देने के लिए मौजूदा द्विपक्षीय कार्यप्रणालियों को पुर्नजीवित करने पर जोर दिया।
दोनों प्रधानमंत्रियों ने माना कि भारत और नेपाल मुख्य रूप से कृषि बहुल देश है, इसलिए कृषि क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग को नई गति प्रदान करने के लिए दोनों देश तैयार हुए। कृषि अनुसंधान और विकास, शिक्षा, प्रशिक्षण तथा छात्रवृति, आपूर्ति और उपयोगिता श्रृंखला को मज़बूत बनाना, जलवायु लचीलापन, मृदा स्वास्थय और खेती से जुड़े अन्य मुद्दों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। नेपाल की लगभग 76 प्रतिशत आबादी कृषि संबंधी गतिविधियों में शामिल है।
भारत और नेपाल में परस्पर हितों के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में तीन अलग-अलग संयुक्त वक्तव्य जारी किए गए, जिनमें-भारत-नेपाल में कृषि में नई साझेदारी, रेल संपर्कों के विकास में भारत में रक्सौल को नेपाल में काठमांडू से जोड़ना, भारत और नेपाल के बीच आंतरिक जलमार्गों के जरिए नए संपर्क साधन जैसे विषय प्रमुख रूप से शामिल थे। प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस बात पर सहमत हुए कि यह दौरा दोनों देशों के बीच बहुआयामी साझेदारी को नई गतिशीलता प्रदान करेगा।
प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने उन्हें और उनके प्रतिनिधिमंडल को निमंत्रित करने और गर्मजोशी से भरे स्वागत के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद दिया। प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने शीघ्र नेपाल आने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी आमंत्रित किया, जिसे प्रधानमंत्री ने स्वीकार कर लिया। भारत में तीन दिन ठहरने के दौरान प्रधानमंत्री ओली ने भारत के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और उप राष्ट्रपति एम वैंकेय नायडू से मुलाकात की। श्री ओली गृहमंत्री राजनाथ सिंह और विपक्ष के अध्यक्ष राहुल गांधी पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह से भी मिले।
इस यात्रा से पूर्व भारत और नेपाल के दशकों पुराने विशिष्ट संबंध तनाव के ताप से जूझ रहा था। चीन तो चर्चा में अभी आया है। भारत का हमेशा से नेपाल पर व्यापक प्रभाव रहा है। भारत ने घोषणा कर रखी है कि वह नेपाल के आंतरिक और राजनीतिक मामलों में कोई हस्तक्षेप नहीं करता है। लेकिन भारत के नेपाल में इतने हित हैं कि हकीकत में ऐसा होता नहीं है। इसलिए हस्तक्षेप उतना ही हो, जिससे नेपाल की जनता का भरोसा न टूटे और लोगों को यह न लगे कि भारत बड़े भाई की भूमिका निभा रहा है और आंतरिक मामलों पर एक तरह से हुक्मनामा सुना रहा है। भारत को नेपाल से रिश्तों की मधुरता हर हालत में कायम रखनी होगी, ताकि चीन को वहां पांव जमाने का कोई अवसर न मिले। उम्मीद है कि यह यात्रा काफी हद तक नेपाल-भारत के रिश्तों के बीच सुमधुर संबंध को दुबारा पटरी पर लाने में सहायक होगा।

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