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मां सरस्वती से ही संभव हो सका मानव में ‘वाणी’
मां सरस्वती से ही संभव हो सका मानव में ‘वाणी’

मां सरस्वती से ही संभव हो सका मानव में ‘वाणी’

Shri Bhola Jhaभोला झा (गुरूजी) :

एशिया में महिलाओं की स्थिति ने पिछली सदियों में कई बड़े बदलावों का सामना किया है। प्राचीन काल में पुरुषों के साथ बराबरी की स्थिति से लेकर मध्यकाल के निम्न स्तरीय जीवन और आधुनिक काल में महिलाओं के बढ़ते कदम के साथ ही कई सुधारकों द्वारा समान अधिकारों को बढ़ावा दिये जाने तक महिलाओं का इतिहास काफी परिवर्तनषील रहा है। आज की महिलाएं राष्ट्रपति,  प्रधानमंत्री, लोक सभा अध्यक्ष, प्रतिपक्ष की नेता आदि शीर्ष पदों को सुशोभित कर रही हैं। देश, काल, परिस्थिति के अनुसार स्त्री शक्ति की अवस्था में परिवर्तन शिक्षा को ठहराया जा सकता है। जिस युग में महिलाएं उच्च शिक्षा को प्राप्त किया। इस समय स्त्रियों का प्रतिनिधित्व हर क्षेत्र में सराहनीय पाया गया। हमारी संस्कृति में स्त्री को दुर्गा, काली वैष्णों देवी, सरस्वती, आदि रूपों में पूजा जाता है। मानव सभ्यता के आरंभिक वर्षों में कोरी स्लेट की भांति था लेकिन मां सरस्वती की असीम अनुकंपा के उपरांत उन्हें ज्ञान की प्राप्त हुई। इसी उपलक्ष्य में मानव सरस्वती पूजा को अपने दैनिक जीवन में महत्व देना आरंभ किया। सरस्वती पूजा हिन्दुओं का एक खास पर्व है। यह प्रतिवर्ष वसंत पंचमी मनाया जाता है। मां सरस्वती को विद्या की देवी माना जाता है। इन्हें विद्यादायिनी एवं हंस वाहिनी भी कहा जाता है।

मां सरस्वती से ही संभव हो सका मानव में ‘वाणी’
मां सरस्वती से ही संभव हो सका मानव में ‘वाणी’

इस वर्ष यह पर्व 22 जनवरी, 2018 को मनाया जाएगा। मान्यता है कि इस दिन मां सरस्वती का जन्म हुआ था। पतझड़ के उपरांत वसंत ऋृतु का आगमन होता है। स्वयं भगवान श्री कृष्ण ने कहा है कि ऋृतुओं में मैं वसंत हूं। ऐसी मान्यता है कि सृष्टि के आरंभ में भगवान विष्णु की आज्ञा से ब्रह्मा ने मनुष्य की रचना की। परन्तु वे मुक रह गये इसलिए ब्रह्मा जी अपनी सर्जना से संतुष्ट नहीं थे। उन्हें यह आभास हुआ कि मनुष्य की उत्पत्ति में एक विशेष गुण की कमी रह गई है। विष्णु जी से मशविरा करके ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से जल छिड़का। धरा पर जलकण बिखरते ही उसमें कंपन होने लगी और एक अद्भूत शक्ति का प्राकट्य हुआ। यह प्रादुर्भाव एक चतुर्भुजी सुंदर नारी का था जिसके एक हाथ में वीणा तथा दूसरा हाथ वर मुद्रा में था व अन्य दोनों हाथों में पुस्तक एवं माला थी । ब्रह्मा जी ने उस प्रकट देवी से वीणा बजाने का अनुरोध किया। जैसे ही देवी ने वीणा बजाना प्रारंभ किया, पूरे संसार में एक मधुर ध्वनि फैल गई। इसके पश्चात दुनिया के सभी जीव-जन्तुओं को वाणी प्राप्त हो गई। तब ब्रह्मा जी ने उस देवी को वीणा की देवी सरस्वती कहा। यह उत्पत्ति वसंत पंचमी के दिन हुई इसलिए वसंत पंचमी के दिन इनका जन्मदिन मनाया जाता है।

मां सरस्वती का संबंध ज्ञान, शिक्षा एवं बुद्धि से है। सभी जीवों में मानव को उच्च कोटि प्राप्त है। यह केवल मां सरस्वती के वरदान के फलस्वरूप ही संभव है। मां सरस्वती के पूजा का इतिहास प्राचीन काल से लेकर अद्यतन मौजूद है। सूर, संगीत एवं कला के प्रेमी सरस्वती माता का पूजन बड़े उत्साह एवं उल्लास से करते हैं। इनकी आराधना से मनुष्य में ज्ञान का विकास होता है। इन्हीं की कृपा से मानव बंदर योनी से इन्सान बना। मनुष्यों में सभ्यता व संस्कृति का विकास हो पाया। मां सरस्वती ब्रह्मा जी की अर्धांगनी कहलाती है जिन्होंने सृष्टि की रचना की और उसी सुंदर सृष्टि में मां सरस्वती ने ज्ञान, कला एवं सभ्यता का विकास किया। सरस्वती देवी की आराधना से मंद बुद्धिजीवी का भी विकास होता है अर्थात् वह मानव जो एकाग्र मन से मां के चरणों में स्वयं को समर्पित करता है, उसका विकास निश्चित है। मां सरस्वती की पूजा अर्चना से जड़ मंदबुद्धि कालिदास के जीवन का उद्धार हुआ और वे एक सफल उच्च गुणी कवि के रूप में विश्वविख्यात हुए।

सरस्वती मां कमल पर आसीन रहती है। इसके पीछे एक बहुत बड़ा संदेश मिलता है। मां हमें यह शिक्षा देना चाहती है कि कैसी भी विकट परिस्थिति अथवा संगति क्यों न हो, अगर अपने चित्त पर नियंत्रण रख अपने लक्ष्य की तरफ बढ़ेंगे तो कीचड़रूपी असंगति एवं विकट समस्या के बीच भी कमल की तरह शोभायमान होते रहेंगे। वीणा इनका मुख्य वाद्ययंत्र है जिसे मां सरस्वती का रूप माना जाता है। कला प्रेमी अपने कर्त्तव्य क्षेत्र में उच्च व्यवस्था को इन्हीं के आशीर्वाद के फलस्वरूप प्राप्त होता है। इनके अन्य दो हाथों में पुस्तक एवं माला भी संदेश देती है।

मां सरस्वती के स्वरूप को जो व्यक्ति समग्रता के रूप में ग्रहण कर लेगा, वह सम्पूर्ण मानव बनकर उभरेगा। इसलिए इस खास दिन मां ज्ञान की देवी को खुश करने के लिए घरों में, दफ्तरों में, हर उन संस्थानों में जहां पर ज्ञान की पूजा होती है उस जगह पर मां सरस्वती का विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की जाती है जिससे मां हमेशा अपनी ज्ञान की छाया हम अज्ञानी लोगों पर सदैव बनायें रखें।

संपर्क – 9868161202

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