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विलक्षण प्रतिभा के धनी ‘अभय दास’ नहीं रहे

मिथिला, मैथिल और मैथिली के लिए समर्पित बहुआयामी प्रतिभा के धनी बिहार के मधुबनी जिला स्थित नवानी निवासी अभय कुमार लाल दास ने गंभीर बीमारी से लड़ते हुए आखिर 10 अप्रैल, 2019 को अपने प्राण त्याग दिये। वो अपने पीछे पत्नी व दो बालक छोड़ गये।


कुछ लोग जन्म से ही विलक्षण प्रतिभा के धनी होते हैं। ऐसे लोग अपने बेहतरीन काम की वजह से जाने जाते हैं। जी हां, 07 जनवरी, 1965 को जन्में दास बाबू मैथिल, मिथिला और राजधानी दिल्ली में अपने मधुर स्वाभाव के कारण कम उम्र में ही सर्वप्रिय और सर्वपरिचित हो गए थे। वो सीए बनने का लक्ष्य लेकर लेकर दिल्ली तो पहुंचे लेकिन ईश्वर को कुछ और ही मंजूर था। एक सामाजिक व्यक्तित्व होने के नाते उन्होंने 1992 में भारतीय जीवन बीमा निगम में विकास अधिकारी पद के कार्यभार को चुना। इसी वर्ष दिल्ली में अपने मातृभमि के प्रेम ने उन्हें ‘मिथिलांगन’ संस्था की स्थापना हेतु प्रेरित किया और अंत तक आजीवन सचिव के दायित्व को बखूबी निभाया। 1997 में एलटीजी सभागार में आयोजित 7 दिवसीय प्रदर्शनी में उनकी प्रमुख भूमिका ने उन्हें चर्चित कर दिया था।


सामाजिकता, सादगी और शिष्टाचार से भरपूर अभय बाबू ने पटना दूरदर्शन पर अपने साक्षात्कार में कहा था कि ‘हम रहे ना रहे, मैथिल व मैथिली का कार्य रूकना नहीं चाहिए। इसी क्रम में उन्होंने निर्धन मेधावी छात्रों के लिए छात्रावास की योजना के बारे में सबको अवगत कराया।


मृदुभाषी, मिलनसार और हंसमुख अभय बाबू अपने मैथिली संस्था के अलावा राजधानी के कई संस्था से जुड़े रहे और उस दायित्व का आजीवन निर्वहन किया।

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