अंबेडकर को समझने कि चुनौती

किसी महापुरुष के बारे में पढ़ने- पढ़ाने, लिखने और व्याख्यान करने का यह मतलब नहीं कि उसके बारे में समझ पैदा हो सके। यह बाबा साहब डाॅ. अंबेडकर की 125वीं वर्षगांठ है, जिसको न केवल दलित मना रहे हैं बल्कि पूरी भारत सरकार। देश के सामने तो चुनौती है ही ...

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शिक्षा व्यवस्था कहां फेल हुई

एक बहुत घातक प्रवृत्ति पैदा हो गयी है कि हर कमी के लिए राजनीतिज्ञ जिम्मेदार ठहराए जा रहे हैं, उसके बाद पुलिस और नौकरशाही। रंगभेद, घरेलू हिंसा, सिविल सोसाइटी के असंवैधानिक कृत्य आदि के लिए भी सबसे पहले राजनीति ही जिम्मेदार ठहराई जाती है। निर्भया कांड जब हुआ तो पूरा ...

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जाति अभी गयी नहीं

शिक्षित लोगों में जब चर्चा होती है तो ज्यादातर लोग यह कहते हैं कि जाति तो बीते दिनों की बात हो गयी है। हाल में हरियाणा में आरक्षण के आंदोलन ने इसका जवाब दे दिया कि जाति सबसे बड़ी सच्चाई है। लोग सब कुछ खो सकते हैं, लेकिन जाति नहीं। ...

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आज के दौर में भगवान बुद्ध की उपयोगिता

  21 मई को बुद्ध पूर्णिमा पड़ रही है | सिद्धार्थ गौतम बुद्ध ने दुनिया को बहुत कुछ दिया है| धर्म की बात हो और उसमें महिला और पुरुष का विमर्श कैसे नहीं हो | बड़े धर्मों से लेकर छोटे धर्म तक ने पुरुष को महत्व दिया है | क्यों नहीं कोई महिला किसी धर्म का प्रवर्तक या ...

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