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बदस्तूर जारी है जातिय विभेद की घटना

निर्भय कर्ण जाति एक ऐसा मुद्दा जिससे कोई भी देश अब तक अछूता न रह सका है। कहीं यह धर्म के रूप में तो कहीं समुदाय के रूप में तो कहीं यह क्षेत्रवाद के रूप में निकल कर आता है लेकिन उपरोक्त इन तीनों में सभी प्रकार के जाति निवास ...

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पृथ्वी मुस्कुराने नहीं सिसकने पर मजबूर

निर्भय कर्ण   जब बारिश की बूंदें धरती/पृथ्वी पर पड़ती हैं तो हमारा रोम-रोम पुलकित हो जाता है, पृथ्वी खुशी से मुस्कराने लगती है और ईश्वर का धन्यवाद करती है लेकिन वर्तमान हालात ने पृथ्वी को मुस्कुराने पर नहीं बल्कि सिसकने पर मजबूर कर दिया है। वजह साफ है सजीवों ...

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सोच बड़ी या शौच

निर्भय कर्ण ‘‘सोच बड़ी या शौच’’ यह सवाल आज हम इसलिए उठा रहे हैं क्योंकि ग्रामीण परिवेश में खासकर देखें तो वहां की मानसिकता को देखकर यह साबित होता है कि शौचालय ही बहुत बड़ी चीज है और सोच बिल्कुल ही छोटी। अधिकतर ग्रामीण यह सोचते हैं कि शौचालय बनाकर ...

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उपभोक्ता अधिकार दिवस की यथार्थता

(24 दिसम्बर- राष्ट्रीय उपभोक्ता अधिकार दिवस) उपभोक्ता अधिकार दिवस की यथार्थता निर्भय कर्ण ‘‘ग्राहक हमारे परिसर में बहुत ही महत्वपूर्ण अतिथि होता है। वह हम पर आश्रित नहीं होता बल्कि हम उस पर निर्भर होते हैं। वह हमारे काम में रूकावट नहीं होता है- वह तो इसका उद्देश्य होता है। ...

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फैशन के रूप में टैटू के प्रति बढ़ती दीवानगी

निर्भय कुमार कर्ण विराटनगर, नेपाल की रहनेवाली बबीता दिल्ली से पढ़ाई पूरी कर घर लौटी तो बहुत ही खुश नजर आ रही थी। खुशी का कारण केवल यह नहीं था कि वह घर बहुत दिनों के बाद आयी है, बल्कि खुशी का एक और प्रमुख कारण था सखी-सहेली द्वारा कौतुहूलता ...

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